सब केहु के फोकटे मे पैख़ाना घर बनादेवे के चाही – सरसफाइ गस्ति टोली के अनुभव (केस रिपोर्ट)

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सरसफाइ गस्ति टोली द्वारा नियमित रूपसे हात सफा केरेके विधि सिखावत

वीरगंज, पर्सा

सरोज चौरसिया

बेरे साढ़े पाँच बजे से ही पर्सा जिल्ला के साबिक गा. वि. स. लखनपुर ( हाल सखुवा प्रसौनी गा. पा.) के एक्डारवा टोल मे एक सरसफाइ गस्ती टोलि तैनाथ रहे । ओह गस्ती टोली मे रही उहवा के वडाध्यक्ष, वाड़ सदस्य लोग, ग्रामिण स्वास्थ महिला स्वएंसेविका, कुछ स्थानिय नागरिक समाज के अगुवा, बाल क्लब के भाइबहिन सब, स्थानिय युवा सब आ हमरा लगायत विकास नेपाल संस्था के सरसफाइ ट्रिग्गरर (Triggerer) लोग, कुल मिलाके करिब ५० जने के एगो समुह ।  उक्त गस्ती टोली के हाथ मे रहे कुछ टॉर्च लाएट, सिट्ठी, पियर झण्डा, साउण्ड बक्स आ माइक ।

गस्ती टोलि हरोजे खानी आजू भी पूरा गांव आ उहवा रहल खुल्ला पैख़ाना करेके सम्भावित जगह के मुताबिक अपना के ४ समूह मे बाँट के चल देहनी सन गस्ती मे । गस्ति करत घरी भोरे भोरे जे कोई भी खुल्ला पैख़ाना करत अवस्था मे मिलल, उनका के उहे जगह पर जाके उक्त गस्ती टोली द्वारा सरसफाइ के अनेकन आधारभूत आवश्यकता, एकर महत्व आ खुल्ला पैख़ाना से होखेवाला बेफाइदा के बारे मे spot triggering (जगहे पर अभियान) कईल जाला आ खुल्ला पैख़ाना ना करके, आपन घर ठाँव मे पैख़ानाघर (टॉइलेट) बनावे खातिर सामाजिक दबाव देवेल जाला ।

सरसफाइ गस्ती टोलि एक महिला सदस्य एवं ग्रामिण महिला स्वस्थ स्वयंसेविका परवर्ती देवी शर्मा कहली, ” खुल्ला पैख़ाना कर रहल दिदि-बहिन लोग के पैख़ानाघर बनाई कहला पर ” चुप कर NGO के दलाल , तोरा त पैसा मिलता त घुम घुम के सिप्टी बनावे के कहतारी, हमनी के कथि सहयोग मिलता कि सिप्टी बनाइ सन् ?

बाक़िर ई सब कार्य करत घरी सामाजिक मर्यादा के भी पूरा ख्याल राखत लैंगिक संवेदनशीलता के भी विशेष ख्याल कईल जाला । महिला के महिला गस्ती आ पुरुष के पुरुष गस्ति सदस्य लोग द्वारा परामर्श देहल जाल । सरसफाई गस्ती टोली के ई नियमित आ दैनिक प्रक्रिया हवे । एकरा खातिर खुल्ला पैख़ाना करे जाए वाला सबेरे आ सझिया दुनु समय पर टोलि सक्रिय रहेला आ बाहर पैख़ाना ना करेके होसके वाला पूरा दवाब देवल जाला । एह प्रक्रिया के Morning आ Evening follow up कहल जाला ।

सरसफाइ अभियान मे व्यवहार परिवर्तन, सचेतना मुलक, सामाजिक परिचालन आदि कार्यक्रम सब जादा से जादा होखेला । बाकी तराई मधेश के जिल्ला सब मे प्रसस्त पानी के उपलब्धता आ प्रसस्त खुल्ला खेत-खलिहान रहला से बहुति लोग सरसफाइ के बारे मे बृहत जानकारी रहला के बाबजुदो पैख़ानाघर बनावे मे आनाकानी करेला । पैख़ानाघर खुद से लगानी मे ना होके सरकार से देहल अनुदान के पैसा से बनावे के चाही जैसन गलत बुझाइ रहल मिलेला । ओहिसे ई बात गस्ती प्रक्रिया मे भी मुख्य प्राथमिकता के साथ राखल जाला ।

ई सभी प्रक्रिया अपनावला से खुल्ला पैख़ाना करेवाला आदमी बहुते लाजा जाला आ सामाजिक प्रतिष्ठा हनन होखेके डर से जेतना जल्दी हो सके ओतना जल्दी आपन गांव ठाँव मे खुद से लगानी करके जल्दी से जल्दी टॉइलेट बनावल आ प्रयोग करल शुरू कर देहल बात उक्त सरसफाइ गस्ती टोली के संयोजक एवं विकास नेपाल संस्था के ग्लोबल सरसफाइ कोष/UNHABITAT कार्यक्रम के फिल्ड संयोजक लक्ष्मन पण्डित बतईनी।

वडा अध्यक्ष्य लाल बहादुर प्रसाद यादव के मुताबिक बिगत एक बर्ष मे हर घर मे पैख़ानाघर बने ना सकल रहे बाक़िर ई सरसफाइ गस्ती टोलि के मद्दत से एक हफ्ता मे ही ३७५ घरधनी के घरमे पैख़ानाघर बनावे मे सफल भईल बा । उहाँ के कहनि, ” बाहर पैख़ाना ना करे देवेनी सन, घर मे पैख़ानाघर हईले नईखे,त हारपाछ करी लोग त का ? अन्तिम विकल्प के रुप मे समुदाय मे धमाधम पैख़ानाघर बनवाल शुरू होजाला आ टोल टोल भा बस्ति बस्ती मे एगोड़े के देखासिखी टोल के आउर घरधनी लोग भी धमाधम पैख़ानाघर बनावे आ प्रयोगमा मे लियावे लागेला लोग “।

सरसफाइ के अभियान द्वारा बानवाल जा रहल पैख़ानाघर
बच्चा के नमूना पैख़ानाघर के प्रयोग के सही तारिक सिखावत गस्ती टोली

सरसफाई गस्ती टोलि परिचालन रहला भर त कोई भी हतपत बाहर पैख़ाना करे ना जला लोग आ पैख़ानाघर भी बनालेला  बाक़िर खु.पै.मु. (खुल्ला दिशा मुक्त) घोषणा बाद जब सरसफाइ अभियानकर्ता आ सहजीकरण संस्था ओह गाँव से लवटला पर पुन: उ लोग बाहर पैख़ाना करे जाई कि ई बात के गस्ती के चिन्ता रहेला । उनका मुताबिक ई सरसफाइ अभियान के निरन्तरता देवे खातिर आ नियमित रुप से जनचेतना फैलावे आ सहजीकरण करे खातिर स्थाई रुप मे ही वडा कार्यालय सब मे कम्ति मे दु जने सरसफाई ट्रिग्गेरर लोग के राखल आवश्यक बा ।

सरसफाइ गस्ती टोलि के ही एक महिला सदस्य एवं ग्रामिण महिला स्वस्थ स्वयंसेविका परवर्ती देवी शर्मा कहली, ” खुल्ला पैख़ाना कर रहल दिदि-बहिन लोग के पैख़ानाघर बनाई कहला पर ” चुप कर NGO के दलाल , तोरा त पैसा मिलता त घुम घुम के सिप्टी बनावे के कहतारी, हमनी के कथि सहयोग मिलता कि सिप्टी बनाइ सन् ? उ आगा कहली, ” एगोड़े दिदि त तश्ला ही हमनी के टोली ऊपर फेक देली आ बिहान से गस्ती मे उ लोग के गस्ती करे ना आवे के चेतावनी तक दे देहली।

ओइसही सरसफाइ अभियान मे सबेरे आ रात के गस्ती कईला पर जान तक के खतरा बा, इहे अभियान के एरिया संयोजक एवं विकास नेपाल के कर्मचारी जिल्लाजित राउत गद्दी कहनि, ” अभियान के क्रम मे घरदुवार चाहे गस्ती करे जात बेर समुदाय के कुछ युवा सब भा अभिभावक लोग अपशब्द तक प्रयोग करत कहेला की ‘पैख़ानाघर तोहर बाबू आके बना दिहे की हम बनाई ? रहल जेतना पैख़ानाघर बनावे खातिर आईल सरकारी अनुसन्धान सब खुदे पचा जाला सन आ हमनी के अपने पैसा से पैख़ानाघर बनावे लगावे के कहेलसन ? ” ऊहा के आगा कहनि, ” एक जने भैया त ईहा तक कहनि की बिहान से उनका टोल मे गस्ती टोली आईल त भल्ला से (हतियार ) तोहनी के गाथ देम चाहे ओकरा खातिर जेल मे बैठे के परी त का, बाक़िर पैख़ानाघर ना बनाएम “।

जिल्ला के सरसफाइ के अवस्था बारे विश्लेषण कैला पर पर्सा जिल्ला मे ८६ % घरधनी लोग के पैख़ानाघर के पहुच रहल बा त आजू के मिति मे साबिक के ६६ गाबिस मेसे ४२ गो साबिक के गाविस खुल्ला पैख़ाना मुक्त हो चुकल बा।

सरसफाई अभियान मे अइसन बहुति बाधा व्यवधान एवं चुनैति सब बाड़ सन जेकरा के जिल्ला स्तर से ही समाधान करेके परी विकास नेपाल पर्सा के ग्लोबल सरसफाइ कोष / UNHABITAT कार्यक्रम के कार्यक्रम संयोजक मुकेश पण्डित के कहनाम बा। उ कहलन , ” बितल वर्ष मे साबिक के अधिकांश गा. वि. स. खुल्ला पैख़ाना मुक्त घोषणा खातिर अनुदान मे पैख़ानाघर देवे लाए लाखों रुपिया अलग कइलख लोग आ रिङ्ग निर्माण लगायत आउर निर्माण सामग्री खरिद कैलख लोग बाक़िर ना त उ रिङ्ग सब पारदर्शी तरिका से वितरण भईल ना ही उ गा. वि. स. सब खुल्ला पैख़ाना मुक्त भईल। रिङ्ग वितरण के क्रम मे पहुचवाला के मिलल, राजनितिक दल के नेता सब के आपन लोग के खाली मिलल बाक़िर गरिब भा दलित समुदाय मिलबे ना कैलख, राजनीतिक पहुच नाभईल अधिकांश घरपरिवार के रिङ्ग भी मिले ना सकल। ऐहि कारण से ई अभियान मे अधिकतर साबिक के गाबिस सबमे द्वन्द बा , एगो के सेतिए मे मिलल, हमनी के काहे ना मिली ? कहेवला समुदाय के जिद्ध आ अन्तर्द्वन्द के बीच मे हमनी के काम करेके परेला “।

सरसफाइ गस्ती टोली के सदस्य लोग पूर्ण रुप मे निस्वार्थ भावना से निशुल्क रुप मे सहयोग करत रहेला आ उ लोग के एकेगों स्वार्थ रहेला की उ लोग के गाँव जेतना जल्दी खुल्ला पैख़ाना मुक्त होसको आ ओह लोग के गावके लोग के एगो सभ्य नागरिक के परिचय दे सको लोग । सबेरे आ सझिया के गस्ती बाद दिन के घर-घर जाके साबुन पानी से हात धोवे के प्रदर्शनी, बिद्यालय सरसफाइ जैसन अति आवश्यक कामकाज भी नियमित रुप मे संचालन होखत रहेला ।

सरसफाइ गस्ती टोली द्वारा घरघर जाके संचालित अनेकन सचेतना मूलक कार्यक्रम के दृश्य

सुरु के अवस्था मे साबिक के गाबिस लखनपुर मे कुल ६६७ घरधनी मेसे मात्र ८० घरधनी मे पैख़ानाघर के पहुच रहे त आजू के अवस्था मे ६२५ घरधनी पास पैख़ानाघर निर्माण होके प्रयोग समेत हो रहल के अवस्था बा आ बाकि ४२ घरधनी लोग के भी तिब्रताका साथ पैख़ानाघर निर्माण कार्य हो रहल के अवस्था बा।

जिल्ला के सरसफाइ के अवस्था बारे विश्लेषण कैला पर पर्सा जिल्ला मे ८६ % घरधनी लोग के पैख़ानाघर के पहुच रहल बा त आजू के मिति मे साबिक के ६६ गाबिस मेसे ४२ गो साबिक के गाविस खुल्ला पैख़ाना मुक्त हो चुकल बा।

लेखक – एक सरसफाइ अभियंता हई आ बिगत 3 बर्ष से पर्सा जिल्ला के खुल्ला पैख़ाना मुक्त अभियान मे पर्सा जिल्ला संयोजक के रूप मे काम करत आ रहल बानी । 

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