सिमरौनगढ़ के भाषा के अस्तित्व

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भरत साह

ध्यकालीन भाषा सम्बन्धी जदि काठमाण्डु में रहल मल्लकालिन साहित्य के शोध कएल जाओ त एगो बहुत बड़का राज उजागर होख’लई जउन अभी ले सब केहु से लुकावल जाईत रहलै ह। सिमरौनगढ़ से अंग्रेज़ी के प्रोफ़ेसर सुनिल मिश्र जी एगो बात पर जोर देव’लईन कि बज्जिका न त भोजपुरी है, आ न मैथिलीए।

एकर सबूत है, ठोस आधार है।

लगभग सय डेढ़ सय बरिस अगति ले मैथिली के बंगला के बोली मानल जाईत रहै। आ विद्यापति के भाषा तथा सिमरौनगढ़ के कविशेखराचार्य ज्योतिरीश्वर ठाकुर के वर्ण रत्नाकर के भाषा के बंगले मानल जाईत रहै। बंगलाभाषी भाषाशास्त्री के आधिपत्य रहै काहेसेकि अंग्रेजी माध्यम में पहुंच ओ लोग के पहिले होलै।
नतीजतन, विद्यापति के बहुत सारा शब्द जौन बंगला में प्रयोग न होख’लई ओकर दलील देहल गेलै कि उ सब पुरान बंगला में बोलल जाईत रहै, नवीन बंगला में न प्रयोग होख’लई ! यानि कि विद्यापति के बहुत शब्द सब “obsolete Bengali words” में लिखल गेल है !
कुछ अईसने दलील उड़िया वाला भी देईत रहै।

बाद में जाके बिहार के शोधकर्ता सब पढ़े लिखे वाला हो गेलै त फरक दावा पेश करल गेलै – 50% शब्द बंगला से मिलैत रहै विद्यापति के त अब ओकरा कहल गेलै कि 75% शब्द मैथिली से मिलैत है त विद्यापति के भाषा मैथिली होलै, आ जौन शब्द न मिलैत रहै ओकरा उहे कहल गेलै जउन दलील बांग्ला भाषा के पक्षधर लोग देईत रहै, यानि कि – “obsolete Maithili words” प्रयोग कएल गएल है विद्यापति द्वारा !

मैथिली भाषाविद के बुझाई में समस्या ई बात से बुझु – मैथिली भाषा के शब्दकोष अनुसार “अईसन, जैसन, कैसन, ईत्यादि” obsolete शब्द है, जबकि बज्जिका भाषा जेकरा मैथिली के “बोली” मानले है उ सब, उ भाषा में प्रमुख शब्द उहे सब है । अब बताउ, ई बात से शुद्ध आ अशुद्ध के निर्धारण होईत है कि न मैथिली भाषा में ? मैथिली भाषाविद के अनुसार हमनी बज्जिका भाषी के भाषा अशुद्ध मैथिली या obsolete मैथिली होलै !

बज्जिका क्षेत्र बहुत जादे पिछड़ल होला से अपन सांस्कृतिक/साहित्यिक ईतिहास पर भी दावा करेके लायक न रह गेलै। दोसर भाषा एकर विरासत के अपन बना लेलै आ बज्जिका ओकरा सामने तुच्छ बनके रह गेलै। अगर बज्जिका क्षेत्र के शोधकर्ता यदि शोध करौक त ई सब बात के पर्दाफाश करल जा सक’लै। उदाहरण के तौर पर सिमरौनगढ़ के कविशेखराचार्य ज्योतिरीश्वर ठाकुर के वर्ण रत्नाकर के भाषा के सबसे बेसी समानता सिमरौनेगढ़ के भाषा से है, ओहमें सबसे बेसी प्रयोग भेल शब्द – अईसन, कईसन, जईसन है जौन मैथिली में प्रयोग न होख’लई तहियो दावा मैथिली के स्थापित हो गएल है!

मल्लकाल के भाषा पर भी मैथिली के दावा है, जबकि ओकर सबसे बेसी समानता बज्जिका से है! नेपाली शोधकर्ता का जाने गेलै बज्जिका कथि आ मैथिली कथि (सन 2011 के जनगणना में नेपाली surveyor लोग के 10 मिनेट लागल हमरा ओकनी के समझावे में ओकनी के प्रश्न “यो बज्जिका कुन भाषा हो”! के उत्तर में। ओकनी हाली मानते न रहै मातृभाषा में हमर भाषा के बज्जिका लिखेला !)…बज्जिका के त नामो न थाह होला से काठमांडु के मल्लकालीन भाषा के मैथिली मान लेहल गेलै नेपाली शोधकर्ता द्वारा !

– लेखक समाजशास्त्री हइँ आ अभिन सिमरौनगढ़ पर शोध कर रहल बानी ।

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