स्थानीय तह के जनप्रतिनिधियन के मासिक वेतन ना देवे के सर्वोच्च के आदेश

    171

    काठमाण्डू, २ कार्तिक ।

    सर्वोच्च आदालत स्थानीय तह के जन प्रतिनिधि लोग लेते आ रहल मासिक परिश्रमिक असंबैधानिक ठहर करत रोक लगावे के आदेश देहले बा । प्रदेश १ बाहेक ६ गो  प्रदेश ए बनावल स्थानीय तह के प्रदाधिकारी के सुबिधा आ पारिश्रमिक एन के हिसाब से देहल पारिश्रमिक आ सुबिधा असंबैधानिक ठहर करत रोके के आदेश देहले बा ।

    प्रधानन्यानधीश चोलेन्द्रशमशेर राणा, दीपक कुमार कार्की, केदार प्रसाद चालिसे, मिरा खड्का आ हरी कृष्ण कार्की के संबैधानिक इजलास से यी आदेश देहला के बाद देश भर के करीब ३० हजार प्रतिनिधि प्रभावित भइल बा लोग । स्थानीय तह के जनप्रतिनिधिके प्ररिश्रमिक देहल संबिधान के धारा २२० के उपधारा ८ आ धारा २२७ के बिपरित बा सर्वोच्च ठहर कईले बा ।

    सर्वोच्च के प्रदेश २, प्रदेश ३, गण्डकी, प्रदेश ५, कर्णाली आ सुदूरपश्चिम प्रदेश सभा से पारित कईल स्थानीय तह के पदाधिकारी आ सदस्य के सुबिधासम्बन्धी एन २०७५ के दफा ३ के भीतर स्थानीय तह के जनप्रतिनिधि के पारिश्रमिक मिलेवाला हिसाब से बनावल गईल अनुसूची बदर करे के आदेश देहले बा ।

    ओइसे ही प्रदेश २ आ प्रदेश ५ के बनावल गईल उ एन के दफा १० मे रहल पारिश्रमक लिखल शब्द भी बदर करे के आदेश देहल गईल बा । सर्वोच्च काल्हे के मिति से जनप्रतिनिधियन के पारिश्रमिक रोके के आदेश देहले बा ।

    ६ गो प्रदेश सभा के बनावल स्थानीय तह के जनप्रतिनिधि के परिश्रमिक सम्बन्धी कानून संबिधान से नईखे मेल खात क़हत अधिवक्ता लोकेन्द्र बहादुर ओली भादो १ गते रिट दायर कईले रहले ।

    advertisement

    राउर टिप्पणी

    राउर टिप्पणी लिखी
    Please enter your name here