स्थानीय सरकार के सफलता खातिर सहमति–सहकार्य

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वीरेंद्र प्रसाद यादव

गभग साठ वर्ष के संघर्ष के फल स्वरूप एकतंत्रात्मक राजतंत्र के छोड़Þके मुलुक आज संघीय गणतंत्रात्क व्यवस्था में पुगल बा । हलाँकि संविधान अभीन पूर्ण त नइखे, बहुत कुछ खामी देखावलो जा रहल बा, बाकिर एह व्यवस्था में पुगल मुलुक आ जनता खातिर उपलब्धि त हवे ही विभेद के अंत आ समृद्धि के प्रमुख आधार भी हवे । काहे कि विश्व में बहुत सारा मुलुक लोकतांत्रिक रूप से विकसित भइल बा जवना में संघीय शासनको बहुत होत बा । मुलुक भीतर के विभेद भी अंत करे में संघीय शासन के बहुत भूमिका रहल । अमेरिका, भारत जइसन विविधता से भरल मुलुक में नागरिक एकता आ विकास के पूर्वाधार बनावे में संघीयता के बहुत भूमिका रहल बा । स्वीटजर लैंड जइसन छोट मुलुक भी आज विकसित आ नमूना मुलुक के श्रेष्णी में परता । दक्षिण अफ्रिका में रहल सयकड़ो बरष के गोरा–काला के विवाद भी संघीयता के माध्यम से ही अंत भइल बा । कुछ मुलुक में संघीयता से प्रतिकूल प्रभाव भी परल बा जइसे इथियोपिया, नाइजेरिया । एह दृष्टांत सब से इहे कहल जा सकता कि संघीयता विकास आ विभेद अंत के एगो आधार त हवे बाकिर सर्वेसर्वा ना हवे । संघीयता आपन उद्देश्य में तबे सफल होई जब संघीयता के बँढि़या तरिका से लागू कइल जाई । व्यवस्था प्रति हरेक जनता के एकता आ सहमति होई । कवनो किसिम के विवाद राखके अगाड़ी बढ़ला से कवनो भी व्यवस्था सफल होखे में चुनौती बा । नेपाल में त विविधता अनेको बा । इहाँ के विभेद भी बहुत किसिम के बा । इहे लंैगिक, क्षेत्रीय, सामुदायिक, जातीय, धार्मिक लगायत के दर्जनो विभेद बाड़सन जवना के अंत ना होई त नया व्यवस्था के अगाड़ी भी बहुत चुनौती आई ।

आम जनता के दलीय विवाद ना, समाजिक विकास के जरूरी बा । सामाजिक विकृति–विसंगति अंत के आवश्यकता बा । 

अभी मुलुक से राजतंत्र अंत होके संघीयता लागू भइल बा जवना में एगो सरकार से आज अनेक सरकार बनल बा । ७ सय ५३ गो स्थानीय सरकार बा ७ गो प्रदेश सरकार आ एगो केंद्रीय सरकार । एसो ई बात प्रष्ट होता की एगो सिंहदरबार में रहल शक्ति देश के कोना–कोना में पुगावल बा । हरेक जनता के घर घर में अधिकार पुगावल बा । पहिे खाली सिंह दरबार से ही कानून बनत रहे बाकिर अभी हरेक गाँव–गाँव में कानून बनावे के अधिकार बा । संविधान से ई अधिकार पावल आ स्वायत्त संसद आ सरकार बनल बहुत खुशी के बात हवे बाकिर ई स्थानीय आ प्रदेश सरकार के सफलता भी ओतने जरूरी बा । पावल अधिकार कानून एवम न्याय पूर्वक प्रयोग ना होई त नाफा से जादा नोक्सान हो सकता । संघीयता विफल भी हो सकता । ओ से अभी विशेष करके स्थानीय सरकार आ प्रदेश सरकार के बहुत गंभीर होके आपन भूमिका निर्वाह कइल जरूरी बा । स्थानीय सरकार आ प्रदेश सरकार के बहुत सारा अधिकार मिलल बा बाकिर सब अधिकार प्रयोग करे खातिर कानून बनाके ही करेके परी बिना कानून बनइले कवनो काम ना करेके होई । बिना कानून बनवले काम होई त अराजक त होखबे करी अख्तियार के कारवाई में भी परे के परी ।

२२ गो विषय में स्थानीय सरकार के कानून बनावे के अधिकार बा जवन गाँव परिषद से ही बनी । साल में २ बेर मात्र सभा बोलावे के अधिकार बा । गाँव भा नगर सभा में कानून ना बनी त फेर समस्या हो जाई । ओ से सभा स के औपचारिका में सीमित ना करके कानून बनावे में प्रयोग कइल जरूरी बा । स्थनीय सरकार संचालन ऐन, २०७४ आ संविधान में व्यवस्था भइल मुताविक के समिति भा कानून बनाके अब सब विषय से आर्थिक स्रोत के व्यवस्थापन आ परिचालन में ध्यान देवल जरूरी बा । अभी के स्थानीय निकाय के व्यवस्था देखल जाव त पहिले के व्यवस्था से बहुत फरक बा । अभी सब स्थानीय निकाय में कार्यपालिका, व्यवस्थापिका आ न्यायपालिका तीनू अंग के व्यवस्था बा । जवना में व्यवस्थापिका के काम बा कानून बनावेके कार्यपालिका के काम बा सरकार संचालन करेके आ न्यायपालिका के काम बा तोकल विषय में परल उजुरी पर फैसला करके विवाद के अंत करेके । एह अंग के व्यवस्थापिका संविधान आ कानून में व्यवस्था भइला के बावजुद भी अभी तक प्रायः स्थानीय निकाय में न्यायिक समिति के गठन भइल नइखे लागत । स्थानीय निकाय सब के आपन नियमावली तक बनल नइखे लागत । हरेक स्थानीय तह में कानूनी सलाहकार के व्यवस्था कइल एकदम जरूरी बा फिर भी कानूनी सलाहकार भी सब निकाय में नइखे गठन भइल ।

अभी भी चुनावी प्रतिस्पर्धा के असर स्थानीय निकाय में बा जवना से जनप्रतिनिधि में ही एकता नइखे देखाई देत । जनप्रतिनिधि में एकता ना भइला से विकास अवरुद्ध त बड़ले बा जनसेवा भी प्रभावित भइल स्वभाविक बा । बहुत जगह अध्यक्ष आ उपाध्यक्ष अलग अलग पार्टी से जीतल बा । बहुत जगह अध्यक्ष अल्पमत में बा त उपाध्यक्ष बहुमत में जवन एगो बड़का चुनौती बा । बैठक बोलावे के अधिकार अध्यक्ष के बा, अध्यक्ष के बहुमत ना भइला से बैठक ही बैठे नइखे सकत । जवना से शुरुवाती काम सब ही अवरुद्ध बा । इहे अवस्था रहल त विकास प्रभावित त होखबे करी, पहिले से भी खराब अवस्था हो सकता । जनप्रतिनिधि चुनाव में जीतला के बाद ऊ कवनो पार्टी के मात्र ना हवे । ऊ सब जनता के हवे, ओसे जीतला के बाद पार्टी के नजर से ना देखके जनता आ विकास के नजर से सोचे के परल । कहीं विकास ना होई त अगिला दिन में जनता जनप्रतिनिधि के व्यक्तिगत रूप से जवाफदेहिता खोजी जवना से भविष्य खतरा में पर सकता ।

अभी के स्थानीय तह बीच के विमती के समाधान खातिर प्रदेश सरकार के समन्वयात्मक भूमिका निर्वाह कइल जरूरी बा । सब के अभिभावकत्व के दायरा से सहमति–सहकार्य करावल जरूरी बा । जवना से आम जनता में जनप्रतिनिधि बीच के विमती के गंध ना पुगो । आम जनता के दलीय विवाद ना, समाजिक विकास के जरूरी बा । सामाजिक विकृति–विसंगति अंत के आवश्यकता बा । विभेद के अंत के आ अपराध के निर्मूलीकरण के आवश्यकता बा । ई जन चाहना पुरा करे खातिर जन प्रतिनिधियन के बीच में एकता–सहकार्य होखही के परी । आशा कइल जाओ जनप्रतिनिधि लोग दलीय घेरा से ऊपर उठके आपस में एकता आ सहकार्य करी लोग ।

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