हाय रे मर्निङ , डान्स करले – पृथ्बीलाल साह जी के कविता

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कविता रचनाकार श्री पृथ्बीलाल साह जी त्रिजुद्ध माध्यमिक बिद्यालय में शिक्षक बानी
हाय रे मर्निङ , डान्स करले
मिलल् बा मंच रोमान्स करले
हाय रे……………………….……..
ललकी किरणीया साथ मे लेके
प्रभा के अोढनी हाथ मे लेके
ज्योती के कुछ पल लोक मे देके
आपन चमक जांच करले
हाय रे……………………….……..
भैया के खेतमे कुदत फानत
मेघ के छाया लांघत् लांघत्
अपने शान के लोहा मानत्
बढत् डेग के माप करले
हाय रे……………………….……..
महाभारत के तानडव के आगे
जीवन के अर्थ कुछ ना लागे
मुर्दा मन तनको ना जागे
अभियो  हृदय मे बास करले
हाय रे……………………….……..
लंका मे मेघनाथ के जईसन
छल, बल बाली के जईसन
चमकत् धरती आकाश मे अईसन
जीभर जीवन नाश करले
हाय रे……………………….……..
गोली बारुद झूंठ  खेलौना
संच्चा मन के आगे बौना
लट्कल् बा बेटी के गौना
निर्मल मन के ढांच करले
हाय रे……………………….……..
फूटबल के यी फिल्डमे आके
तेज तरार खेलाडी पाके
खुल्ला मैदान बल भी पाके
मारदे किक् गोल करले
हाय रे……………………….……..
मधुर बेयार मे झुलुवा झुलत्
शान मान के ढोंग मे फुलत्
झुंठा जय के भ्रम मे भुलत
मन के पर्दा साफ करले
हाय रे……………………….……
जीवन के धार पर चलते चलते
गैरोंके शान मचलते मचलते
नदीके लहर पर उगते दुबते
प्यार के दुनिया सांच करले
हाय रे……………………….……..
सागर से हिमालय तक
बरत् ज्योती्  शिवालय तक
तेज प्रकाश बिद्यालय तक
रे अन्धक अंजोत् करले
हाय रे……………………….……..
पृथ्वी के यी प्यार के अर्जी
ना झूंठ फरेब ना तनको फर्जी
जेतने सम्झीं अोतने गर्जी
शान्त मन विश्वास करले
हाय रे……………………….……..
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