१८वाँ अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस वीरगंज सहित देश भर मनावल जा ता । जानी ऐकर ईतिहास ।

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९ फागुन, काठमाड़ो ।

अठारहवाँ अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस भव्य रूप से मनावे के तैयारी चल रहल बा । तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में ओतहाँ के मूल बासिंदा अपना के बंगाली बतावत बंगला भाषा के मान्यता के बात उठइलख । शासन के बागडोर हाथ में लेले पछिमी पाकिस्तान उर्दू के जबरदस्ती लागू कइलस । फलतः १५५२ फरवरी २१ यानी फागुन ९ के दिने भइल विद्यार्थी प्रदर्शन में पुलिस के गोली से चार विद्यार्थी शहीद हो गइलें । अंत में बंगलादेश स्थापना के कुछ बरीस बाद में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक आ सांस्कृतिक संगठन (युनेस्को) सन् २००० के बाद से एह दिन के अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मान्यता देके विश्वभर मनावत आ रहल बा ।

नेपाल में भी कुछ साल से नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान ई दिवस के मनावे के शुरुवात कइले बा । एह साल भाषा आयोग आ युनेस्को से सहकार्य करत नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान फागुन ८, ९ आ १० गते एह पर्व के औपचारिकता के साथ मनावे के कार्यक्रम बनइले बा ।

एकरा साथ साथ भाषा अधिकार से जुड़ल अनेको संघ संस्था के तरफ से एह पर्व के मनावे के परंपरा भी स्थापित हो रहल बा । मधेश भ्वाइस असेंब्ली तराई मधेश राष्ट्रीय परिषद् से सहकार्य के साथ फागुन ९ गते के एगो विशेष कार्यक्रम के कके वीरगंज के नगर सभा गृह में ई पर्व मनावे जा रहल बात असेंब्ली के प्रमुख मातृका यादव से जानकारी मिलल बा । एह कार्यक्रम में भाषाविद् डा‘. रामावतार यादव आ गोपाल ठाकुर का साथे विभिन्न भाषाकर्मी, साहित्यकार, भाषासेवी के उपस्थिति रहे के बात बतावल जा रहल बा ।

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