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साहित्य

भोजपुरिया बचपन – घुघुवा माना  

घुघुवा माना यी खेल मतारी के सहजोग से खेलल जाला । एह खेल मे ६ महिना से ले के ५ साल तक के लईकन लोग भाग लेला । एह खेल मे लरिकन सब के खुबे मजा आवेला । मतारी बिछावना पर चीते सूत जाली । आपन ठेहुना के उपर काओर मोड के लईका के गोड […]

इ नेपाल हऽ इहाँ कागज मे बिकास होला।

वीरगंज, १२ कुवार । इ नेपाल हऽ इहाँ  कागज  मे बिकास होला। गाछ बृक्ष काट   के जंगल के  विनाश होला। पइसा  के आगे  तऽ चौकीदार भी    आन्हर, चौकी  के सामने से   माल    वाइपास होला। लेजाये वाला गांजा लेके बोर्डर पार हो जाला, आम आदमी के झोरा  कय बेर तलाश होला। करोडो से  बजेट […]

मुक्तक : दिल

दिल केहू कूछऊ कही, तू त बूझीय प्यार भईल बा बीना कुछउ बोलले ही ई नैना चार भईल बा गजब के हाल बा दिल के की कूछ बुझात नईखे शक्ती त बा देहीया मे, माकिर दिल लाचार भईल बा !! दर्द अईसन बा दिल के कि कवनों दवाई काम ना करे रहे जे आपना से बढ करके […]

कुछ त ख्याल करि आपन मधेश के ईज्जत

कुछ त ख्याल करी आपन मधेश इज्जत के, दिलाके शासन मधेशी भाइ के ! तराई हवे मधेश वांसी के, इहुवां शासन चाहिँ मधेशी भाइ के !! काहे नइखी समझत हे मधेशी भाइ आपन मधेश माटी के, काहे नइखी समझत हे मधेशी भाइ आपन मधेश समाज के……-(१) बिकात बारे आज के मधेशी दलाल नेता, दु-चार पैसा […]

इ इयाद के का करी हम ?

अगर आदमी रहित तs समझा दिहती । ना समझीत तs मार के भगा दिहती। घाम रहित तs छाता ओढ लिहती। लउकेवाला रहित तs आँख फोड लिहती। हावा रहित तs केंवारी बन्द कर दिहती। अन्हार कोठरी मे जाके बइठ जइती। दिया जे रहित तs मुझा देती। इ तs अदृश्य बा इ इयाद के का करी हम […]

हिन्दी साहित्यकार , खांटी भोजपुरिया , केदारनाथ सिंह जी अब हमनी के बीचे नइखी । आपन बीरगंज परिवार एह…

आज इँहा के हमनी के बीचे नइखी बाकिर इँहा के रचल , लिखल रचना / लेख हमनी के लगे बा जवन हमनी खातिर थाती ह । केदारनाथ सिंह जी के लिखल एगो भोजपुरी लेख – ” हिंदी भुला जानी ” पर किस तरह मिलूँ कि बस मैं ही मिलूँ, और दिल्‍ली न आए बीच में […]

हाय रे मर्निङ , डान्स करले – पृथ्बीलाल साह जी के कविता

कविता रचनाकार श्री पृथ्बीलाल साह जी त्रिजुद्ध माध्यमिक बिद्यालय में शिक्षक बानी हाय रे मर्निङ , डान्स करले मिलल् बा मंच रोमान्स करले हाय रे……………………….…….. ललकी किरणीया साथ मे लेके प्रभा के अोढनी हाथ मे लेके ज्योती के कुछ पल लोक मे देके आपन चमक जांच करले हाय रे……………………….…….. भैया के खेतमे कुदत फानत मेघ […]

राजनितिक होली …… जोगीरा सा रा रा रा

फोरम देखली राजपा देखली , देखली संघिय रंगरूप चपल धारी साहेब बनले , बोलत झूठ के उपर झूठ …… जोगीरा सा रा रा रा कौन नेतवा मोटर चढ़े, आ कौन नेतवा कार कौन नेतवा सर खुजावे, नाम केकर सरकार …… जोगीरा सा रा रा रा संघीय नेतवा मोटर चढ़े, आ राजपाई चढ़े कार कांग्रेसिया भईया […]

केकरा के भोट दिही, केकरा के जिताई।।

 केकरा के भोट दिही, केकरा के जिताई।। अब​ केकरा खातिर​ आन्दोल​न​ मे जाई। अब केकरा के हम लडे खातिर पेठाई।। बुढापा के साहारा शहिद भईल जंग मे। केकरा के भोट दिही केकरा के जिताई।। एमाले भी अईले माओबादी भी अईले। बडका-बडका राष्ट्रबादी भी अईले।। केहु पइसा देखईले केहु ध​म्की दे गईले। केकरा पर विश्वास करी […]

पछतात काहे बाड…?

  पछतात काहे बाड…? स​ब​ गाछ​ काट​ के,प​छ​तात​ काहे बाड​…? अब​ होता ग​र्मी त​,अगुतात​ काहे बाड​…?    पंखा, AC के आद​त​ नु बा तोह​रा त​ब​ गाछ​ के निचे ठ​न्ढात​ काहे बाड​…?    वाताव​र​ण​ नास​ दिह​ल​ फैक्ट​री ल​गाके, पानी न​ईखे प​र​त​ त​,छ​ट​प​टात​ काहे बाड​ …?    किसान​ अउर खेती से न​फ​र​त​ बा तोह​रा, फेर​ ओकरे उब्जाव​ल​ […]

“दुश्मन”

“दुश्मन” दुश्मन शब्द सुन्ते लोग मे डर समाजाला । सब केहु के अन्तर हृदय के तरंग बढजाला ।। जिन्दगी के हर कदम पर रेगनी के काट विछावेवाला । अविस्मरणीय, अनमोल, जीवनरत्न व्यक्ति के “दुश्मन” कहलजाला ।। हमरा फकर बा कि हमहु दुश्मन अरजले बानी । तोहरा मे दुश्मनहित से तनिको कम मेहनत भा समय ना […]

“बखरा” – लघु कथा

“बखरा” – लघुकथा । सब पंच लोग दुनु आदमी के बात सुन लेले बा। बाट बखरा कवनिगा लागी, ई फतींगन बाबा बताएब, चुकी उहाँ के पुरनिया बानी । ” सरपंच बैजू कहले। पूरा गाँव के लोग जुटल रहे बखरा लगावे खातिर। बड़ा ही अचरज वाला मामिला रहे ई। भैरो के एकलौता लईका अब उनके साथे […]

काहाँ से मिलो दहि चिउराके नास्ता ??

काहाँ से मिलो दहि चिउराके नास्ता ?? – गोपाल कुमार यादव ना बा घर मे बियाँ ना बा खाद, इ हो बरस भइनी हम बर्बाद, बियाँ छिटे के बितता म्याद, एसो के बरस होइ भुके हलाद, ना लगे नहर ना परता पानी, पानी बिना भइल बियाँ नोक्सानी, काहा से पैसा लेके किनी दमकल, रोजो इहे सोच […]

हमरो सुन ल बात !

हमरो सुन ल बात ! डभकत पानी मे उसिनल हम इंसान, गारी खात हेपात भइनी आज स्यान, बाडका बात कके देखाव तु खुब सान, के सुने हमार दुख, बुलबुली से बानी हैरान, हमरे उपजावल खात बाड धान पिसान, का इज्जत बा इहाँ बेकारमे भइनी किसान, भोट माँगे आवेके वारी बडका बडका ब्यान, जितलाके वाद के […]

याद ! (भोजपुरी कविता )

                                 याद !                  देखनी तब से मन भइल पागल                  आपन बनावे के आश लागल                     […]

का ई आदमी कहाई ?

का ई आदमी कहाई ? हमहु एगो आदमी हई, हमरा से दुर काहे रहेल ? हमहु त एह देश के एगो पात हई, हमर छुवल काहे ना खाल ? तहरा जइसन हमरो मुह बा, हमरा से काहे ना बोलेल ?   जब हम तोहरा से पुछेनी ई,    काहे खिसिया के भगावेल ?   का […]

बिकाऊ त सभे ह

‘बिकाऊ त सभे ह’   बिकाऊ त सभे ह, लागल दाम नईखे ।             कालाकार त हमहू हई, बाकिर नाम नईखे ॥ नशा त हमरो होला, बाकिर हाथ में जाम नईखे ।   कुकुर इहवो बिटोरा सकेलन, बाकिर लगे चाम नईखे ॥ बिकाऊ त सभे ह, लागल दाम नईखे । […]

ई ह होरी ! (कविता )

ई ह होरी !    – गोपाल ठाकुर बाप कोहनाइल बेटासे  लोग कोहनाइल नेता से कनिया अपना बर से भउजी देवर से काहे कइलऽ बलजोरी ? कोहनाईं मत ई ह होरी !     लड़िका पर खिसिआईं मत भूलाइओ के ओके पढ़ाईं मत कुश्ती छोड़ीं, तेक्वांदो सिखाईं लमर भइल निमन त नेता बनाईं देखत रहीं […]

विश्व कविता दिवस पर आनन्द के कविता “लुट लs”

विश्व कविता दिवस पर आनन्द के कविता “लुट लs”     काठमांडू चैत ७- आनन्द कुमार गुप्ता विश्व कविता दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय राजदुतावास काठमाडौं द्वारा नेपाल-भारत पुस्तकालय काठमाडौं में बहुभाषिक कवि सम्मेलन “पोयमाण्डू” के आयोजना भइल रहे । जेमे अलग अलग भाषा के कवि लोग आपन आपन कविता सुनवले रहे । हमरों भोजपुरी […]

गंवार !!

गंवार !! जब-जब तु कहेलु हमराके गवार । फकरसे सिना फुलके चौरा होजाला हमार ।। न जानि काहे तु हरदम रटत रहेलु शहर-बजार । स्वर्गसे सुनर ए गाउवाके अपने बा कला संस्कृति हजार ।। मन नि कि इहा नइखे होटल-रेस्टुरेन्ट ना डिस्को- बार । पर हर भोजनमे अपने माटीके मिठास भरल रहेला परिकार ।। इ […]